Thursday, February 27, 2014

अनमोल समय

आनेवाला पल जानेवाला है, हो सके तो इसमें जिंदगी बिता दो
पल जो ये जानेवाला है।

गुलजार का लिखा ये गीत बहुत ही खूबसूरती से संदेश देता है कि वक्त को बर्बाद न् करो, क्योंकि जिन्दगी इसी से बनी है| जीवन छोटा ही क्यों न हो, समय की बर्बादी से वह और भी छोटा हो जाता है। अतः मित्रों, समय का उचित उपयोग करके हम अपने जीवन को आम से खासबना सकते हैं।

हम सभी के पास 24 घंटे होते हैं, न इससे कम न ज्यादा। हम समय को बढा नही सकते सिर्फ अपनी रुचियों और क्रियाओं को व्यवस्थित कर सकते हैं। अधिकतर लोगों का यही कहना होता है कि क्या करें वक्त ही नही मिलता ?

मित्रों, ईश्वर ने समय सबको बराबर बाँटा है जिनसे हम भौतिक और आध्यात्मिक दोनो ही साधनों से अपने लक्ष्य को पा सकते हैं। अमीर-गरीब, बूढे-जवान सभी को ईश्वर प्रतिदिन 24 घंटे का एक चेक देता है, जिसे उसी दिन भुना सकते हैं या उसका उपयोग कर सकते हैं अन्यथा चेक रद्द(नष्ट) हो जायेगा। समय ऐसा धन है जो एक बार नष्ट गया तो वापस नही मिलता। ईश्वर के इस अनमोल उपहार का उपयोग हम कैसे करते हैं उसी आधार पर हमारी सफलता निश्चित होती है।

हर सफल व्यक्ति के पीछे सफलता के कई कारण होते हैं जिसमें समय प्रबंधन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। हमारे पास एक दिन में उतने ही घंटे होते हैं जितने हेलर केलर, लुईपाश्चर, आइंस्टाइन, लियोनार्डो द विन्ची, माइकल ऐंजेलो जैसी अनेक विभूतियों के पास थे। हम हैं कि समय का रोना रोकर अपनी जिम्मेदारियों से दूर भागने का प्रयास करते। मित्रों, जो समय का ज्यादा दुरुपयोग करते हैं, वे ही समय की कमी की सबसे ज्यादा शिकायत करते हैं। शेक्सपीयर ने कहा है कि-
मैंने समय को नष्ट किया है। अब समय मुझको नष्ट कर रहा है।

 आज की भागदौङ और प्रतिस्पर्धा वाले समय में उत्साह से भरा पूरा एक दिन कब गुजर जाता है पता ही नही चलता। वहीं असंतुष्ट इच्छाएं और इंतजार से बीता पूरा दिन, अंतहीन प्रतीत होता है।

काल करे सो आज कर, आज करे सो अब।

पल में परले होएगी, बहूरी करेगा कब।।

कबीरदास की उपरोक्त पंक्ती समय के महत्व को परिलाक्षित करती है। जीवन में समय का महत्वपूर्ण स्थान होता है। बीता समय कभी लौट कर नहीं आता। अतः हमे चाहिए कि जो समय हमें मिला है उसका सदुपयोग करें।

स्वेट मार्टन ने कहा है कि, हर व्यक्ति को तुरंत दान महा कल्यांण वाली सोच रखनी चाहिये।Make a habit of doing it now

कहते हैं, जो सोया सो खोया, इसलिये वक्त के साथ कदम मिलाकर चलने में ही समझदारी है। समय प्रबंधन ही सर्वश्रेष्ठ कला है जिसके सही उपयोग से हम हर पल को सर्वोत्म बना सकते हैं।

बैंजीमेन फेंक्लिन ने कहा है कि- जो काम आप आज कर सकते हैं, उसे कल पर न टालें।

अनेक शोधों से सिद्ध हो चुका है कि समय का सही नियोजन, असफलता को दूर करते हुए सफलता की ओर बढता कदम है।

मनोवैज्ञानिक डॉ. सुजेन क्लिफोर्ड के अनुसार टाइम मेनेजमेंट तनाव घटाने तथा काम व व्यक्तिगत जीवन को समृद्ध बनाने का तरीका है। समय नियोजन लोगों को अधिक कुशलता से काम करने में मदद करता है।

 'पुरुष बली नहि होत है, समय होत बलवान'

अशोक चक्रधर के अनुसार- समय बङा बलवान है, सबको मारे लात

हंसे कोई रोए कोई, समय समय की बात।।

सच ही तो है दोस्तो, यदी हम जीवन में घटित बुरे वक्त को धैर्य और थोङी समझदारी से निकाल दें तो आगे का पल सुनहरा बना सकते हैं। समय वो चिकित्सक है जो सभी प्रकार के जख्मो को भर देता है।
Time is big healer.

आज के वैश्वीकरण युग में टाइम मेनेजमेंट की चुनौती समय प्रबंधन करना ही नही है बल्की स्वयं का प्रबंधन करना भी है, ताकि सभी कामों को सही तरीके से करने के लिये हमारे पास समय हो जिससे परिवार और काम के बीच संतुलन बन सके। विकास की यात्रा में परिवार का साथ सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। अतः इनके महत्व को भी समझना सफल समय नियोजन है।

वारेन बफे ने कहा है कि-समय अच्छी  कंपनियों का मित्र होता है और औसत दर्जे की कंपनियों का दुश्मन।

किसी लक्ष्य को हासिल करने के लिये किसी शुभ समय के इंतजार में समय बर्बाद न करो क्योंकि समय पर किया हुआ थोड़ा सा भी कार्य उपकारी होता है | समय पर कार्य नहीं करने से व्यक्ति लाभ और उन्नति से कोसों दूर हो जाता है। मार्टिन लूथर किंग जूनीयर ने कहा है कि-

सही काम करने के लिए समय हर वक्त ही ठीक होता हैं

मित्रों, समय किसी की प्रतीक्षा नही करता। दौड़ना काफी नहीं है, समय पर चल पड़ना ही समय का सार्थक नियोजन है। कहते हैं, बीता हुआ समय और मुख से निकले शब्द कभी भी वापस नहीं आते। गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं कि- समय फिरने पर मित्र भी शत्रु हो जाते हैं। अतः मन में विचार रखो कि हर दिन मेरा सर्वश्रेष्ठ दिन है; यह मेरी जिन्दगी है, मेरे पास यह क्षण दुबारा नहीं होगा। यकीनन दोस्तों इसी विचार के साथ आगे बढा कदम जीवन को सफलता की ओर ले जाएगा।

मित्रों मेरा मानना है कि यदि किसी को कुछ देना चाहते हो तो उसे अच्छा वक्त दो

 विवेकानंद जी की पंक्ती से कलम को विराम देते हैं।

Everything is easy, when you are busy.

But nothing is easy, when you are lazy.

Sunday, February 16, 2014

अनेकता में एकता को रौशन करते हमारे त्यौहार

उत्सव जीवन दर्शन है। कहते हैं, सात वार नौ त्यौहार वाला देश है भारत। भारतवर्ष में विभिन्न संस्कृतियों का समागम है। सर्व विदित है कि प्रथम पूज्य मंगल मूर्ती श्री गणेंश उत्सव से ही सभी त्यौहारों का श्री गणेश होता है। जिस तरह सात रंगो के इंद्रधनुष से आकाश की खूबसूरती में चार चाँद लग जाता है, वैसे ही विभिन्न जाती एवं धर्म के उत्सव भारत को खूबसूरत बनाते हैं।

भारत की संस्कृति में त्यौहारों एवं उत्सवों का आदि काल से ही काफी महत्व रहा है। भारत के सभी त्यौहार  समाज में मानवीय गुणों को स्थापित करके लोगों में प्रेम, एकता एवं सदभावना को बढ़ाते हैं। भारत में त्यौहारों एवं उत्सवों का सम्बन्ध किसी जाति, धर्म, भाषा या क्षेत्र से न होकर समभाव से है।

पित्रों को याद करना हमारी भारतीय संस्कृति का श्रेष्ठ संस्कार है। श्राद्धपक्ष में पित्रों को तर्पण देकर उत्सवों का सिलसिला शूरू हो जाता है। पूरे विश्‍व की तुलना में भारत में अधिक त्‍यौहार मनाए जाते हैं। प्रत्‍येक त्‍यौहार का अपना महत्व होता है। सभी देवी देवता, वृक्ष, ग्रह-नक्षत्र, फसल, सहायक पशु, नदी और बदलते मौसम को भी त्‍यौहारों में स्थान दिया जाता है।

कृषी सहायक जानवारों के लिये गोवर्धन पूजा, तो कहीं गायों को बछङे के साथ बछवारस पूजा जैसे धार्मिक कृतियों के कारण जीवों से प्रेमभाव बढ़ता है और नकारात्मक दृष्टिकोण से सकारात्मक दृष्टिकोण की ओर जाने में सहायता मिलती है। तुलसी, वट, आँवला, तथा पीपल जैसे औषधिय पौधों की पूजा करके पौधों का महत्व और बढ जाता है। मौसम के बदलते मिजाज को भी शीतला माता की पूजा से उत्सवमय बना कर हम सब आनन्दित होते हैं। फसल की कटाई हो या बुआई, सभी को बीहु, लोहङी, ओणम, पोंगल, बैशाखी जैसे त्यौहार महत्वपूर्ण बना देते हैं।

रिश्तों को मजबूत बनाने के लिये पति के नाम से करवाचौथ तो भाई के लिये रक्षाबन्धन, बहन बेटीयों के लिये तीज तो कहीं बच्चियों के लिये नवरात्री पूजा, पुत्रों के लिये अहोई व्रत जैसे त्यौहार रिश्तों को आनंदित कर देते हैं। श्री कृष्ण के अनुसार- जीवन एक उत्सव है।

ईद में गले मिल कर भाई-चारे को बढावा मिलता है, सेवई की मिठास हमारी संस्कृति को मिठा बना देती है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज का उपहार खुशियों की सौगात लाता है। सभी त्यौहार आपसी भाई-चारा और सकारात्मकता के साथ शुभ संदेश देते हैं। दिपावली पर दिये जलाकर अमावश्या के अंधकार को दूर करके जीवन को ये संदेश मिलता है कि सार्थक सोच का एक दीपक जीवन को रौशन कर सकता है। मित्रों, जिस प्रकार तिल और गुड़ के मिलने से मीठे-मीठे लड्डू बनते हैं उसी प्रकार विविध रंगों के साथ जिंदगी में भी खुशियों की मिठास बनी रहे। जीवन में नित नई ऊर्जा का संचार हो और पतंग की तरह ही सभी सफलता के शिखर तक पहुंचे। कुछ ऐसी ही शुभकामनाओं के साथ हम सब मकर संक्राती का पर्व मनाते हैं। त्यौहार सभी धार्मिक संप्रदायों और वर्गों के बीच मेल-मिलाप बढ़ाने में सहायक सिद्ध  होते हैं।

त्यौहार हमारे जीवन की जङता को उत्साह में बदल देते हैं। प्रकृति भी हमें मौसम के माध्यम से त्यौहारों के आगमन का एहसास करा देती है। ठंडक का बढना घटना, मौसमी फूलों की खुशबू पूरे वातावरण को खुशनुमा बना देती है। शरद ऋतु की भीनी भीनी ठंड में गुजरात का डांडिया, उत्तर भारत में रामलीला का आयोजन तो बंगाल में दुर्गापूजा समुचे भारत को एक रंग में रंग देते हैं। जीवन एक बगिया है जिसमें उत्सव से हरियाली आती है। उत्सव या त्यौहार इसलिए होते हैं कि जीवन से दुख मिटाकर व्यक्ति एक होकर सुखी रहे। उत्सव के माध्यम से हम सभी प्रकृति तथा ईश्वर की प्रर्थना करते हैं और उसे धन्यवाद देते हैं।

जहाँ त्यौहार दिलों को मिलाते हैं वहीं ये हम सभी को अपनी परंपराओं से पीढी-दर-पीढी जोङते हैं। ईश्वर, अल्लाह या वाहे गुरू कहो, सभी धर्म एक ही धारा में बहते हैं। हमारे त्यौहार भी इन धर्मो से जुङे हुए हैं जहाँ सभी धर्म आपस में विश्वास और मानवता का पाठ पढाते हैं। मित्रों, हम सभी को ये प्रण करना चाहिये कि त्यौहारों के माध्यम से पूरे उत्साह के साथ गंगा जमुनी संस्कृति को विश्वास के दीपक से सदैव रौशन करेंगे। धरती के हर छोर पर उत्साह और उल्लास का वातावरण हो इसी शुभकामना के साथ कलम को विराम देते हैं।
       सुख सपनो की मधुर मनोहर झङियाँ आई,
        त्यौहारें ने खुशियों की बौछार लगाई।

Tuesday, February 11, 2014

हँसने के फायदे

 हँसने के फायदे


आज की भाग दौङ भरी जिंदगी, ऊपर से काम का प्रेशर हममे में से कई लोगों को तो याद भी न होगा कि पिछली बार कब खिलखिला कर हँसे थे। जबकी हँसना हम सभी के लिये अति महत्वपूर्ण है किन्तु हम उसे नजर अंदाज कर देते हैं। मित्रों हँसने से हमारी जिंदगी किस तरह स्वस्थ एवं खुशनुमा हो सकती है उसी के बारे में थोङी सी जानकारी शेयर करने की कोशिश कर रही हूँ , पसन्द आए तो हँसियेगा जरूर. तो आइये जानते हैं हंसने के पाँच फायदे:
1) हंसने से हद्रय की एक्सरसाइज हो जाती है। रक्त का संचार अच्छीतरह होता है। हँसने पर शरीर से एंडोर्फिन रसायन निकलता है, ये द्रव्य ह्रदय को मजबूत बनाता है। हँसने से हार्ट-अटैक की संभावना कम हो जाती है।

2) एक रिसर्च के अनुसार ऑक्सीजन की उपस्थिती में कैंसर कोशिका और कई प्रकार के हानिकारक बैक्टीरिया एवं वायरस नष्ट हो जाते हैं। ऑक्सीजन हमें हँसने से अधिक मात्रा में मिलती है और शरीर का प्रतिरक्षातंत्र भी मजबूत हो जाता है।

3) य़दि सुबह के समय हास्य ध्यान योग किया जाए तो दिन भर प्रसन्नता रहती है। यदि रात में ये योग किया जाये तो नींद अच्छी आती है। हास्य योग से हमारे शरीर में कई प्रकार के हारमोंस का स्राव होता है, जिससे मधुमेह, पीठ-दर्द एवं तनाव से पीङित व्यक्तियों को लाभ होता है।

4) हँसने से सकारत्मक ऊर्जा भी बढती है, खुशहाल सुबह से ऑफिस का माहौल भी खुशनुमा होता है। तो दोस्तों, क्यों न हम सब दो चार चुटकुले पढ कर या सुनकर अपने दिन की शुरुवात जोरदार हँसी के साथ करें।

5) रोज एक घंटा हँसने से 400 कैलोरी ऊर्जा की खपत होती है, जिससे मोटापा भी काबू में रहता है। आज कल कई हास्य क्लब भी तनाव भरी जिंदगी को हँसी के माध्यम से दूर करने का कार्य कर रहे हैं।

दोस्तों प्रकृति भी हमें संदेश देती है- बारिश के बाद खिली धूप, खिला हुआ फूल, लहलहाते हरे भरे पेङ अपनी खुशी का एहसास दिलाते हैं। उनकी इसी खुशी को देख कर हम सब का मन भी खुश होता है, उसी तरह जब हम सब खुश एवं स्वस्थ रहेंगे तो अपने आसपास का वातावरण भी खुशनुमा बना सकते हैं। कहते हैं—“Health is above wealth”.

सोचिये अगर जरा सी मुस्कान से फोटो अच्छी आ सकती है तो खुलकर हँसने से जिंदगी की तस्वीर कितनी खूबसूरत हो सकती है। मित्रों जब स्वास्थ और सामाजिक क्षेत्र में हँसी के अनगिनत फायदें हैं, तो हँसना तो लाजमी है।

Thursday, February 6, 2014

दैनिक समसामयिकी (06 फरवरी, 2014)

दैनिक समसामयिकी (06 फरवरी, 2014)

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Wednesday, February 5, 2014

World Economic Indicator for exam point in Hindi part 1

ये कैसी आधुनिकता

ह कैसी आधुनिकता         


हमें वो वक्त याद आता है जब संयुक्त परिवार हुआ करते थे, हर कोई एक दूसरे के सुख-दुख का साथी था। आज जाने अनजाने में या मजबूरी में खुशियों के वो पल हम सबसे दूर हो गये हैं। आज पैसा सर्वोपरि हो गया, रिश्ते गौंण हो चुके है, मोह-माया का अर्थ  ही बदल गया, आज के परिवेश में माया-मोह कहना शायद ज्यादा उचित होगा। हम सब पता नही किस चीज के पीछे भाग रहे हैं, हमारी आवश्यकताएँ इतनी ज्यादा हो चुकी हैं कि हम ये भूल गये कि कब हम साथ बैठ कर एक दूसरे के सुख-दुख को सुनें।


परिवार के जीवन यापन हेतु पैसा भी जरूरी है, किन्तु इसकी सीमा कौन तय करेगा। आज माया-मोह के वायरस से हम सब ग्रसित होते जा रहे हैं। प्रश्न ये उठता है कि, क्या पैसा कमाने या भौतिक साधन एकत्र करने में  ही आत्मीय सुख है? आज आधुनिकता के सभी साधन बच्चों को मिल रहे हैं। बच्चे कार्टून चैनल तथा विडीयो गेम के साथ बङे हो रहें हैं। दादा-दादी तथा नाना-नानी की कहानियों से वंचित हो रहे हैं। आज लुका-छिपी, सेवन-स्टोन या आइस-वाटर जैसे खेल इतिहास बनते जा रहे हैं, जबकि ये खेल हमें मिलजुल कर रहना, संघठन में शक्ती है, इसकी शिक्षा देते हैं। ये कैसी आधुनिकता जिसने वृद्धाश्रमों की तादाद बढा दी है।


आज त्यौहार पहले से ज्यादा धूम-धाम से मनाते हैं, शादियों में दिल खोल कर खर्च करते हैं। पर वो अपनापन कहीं खो गया है, सब एक छलावा सा नजर आता है। आत्मीयता कहीं खो गई है।


काश आधुनिकता के युग में कुछ ऐसा हो जाए हर जगह भाई-चारा, अमन एवं शान्ति कायम हो जाए। दादा-दादी की कहानियाँ हर बच्चे को नसीब हो जाए। कबीर दास की सीख याद आती है,


साईं इतना दीजिये, जामें कुटुम्ब समायें।


मै भी भूखा न रहूँ, साधू भी भूखा न जाए।।

Monday, February 3, 2014

साहस

 साहस



कुछ पाकर खो देने का डर कुछ न पा सकने का भय, जिन्दगी की गाङी पटरी से उतर न जाए इन्ही छोटी-छोटी चिन्तओं के डर से घिरी रहती है जिन्दगी लेकिन जिस वक्त हम ठान लेते हैं कुछ नया करने का तभी जन्म लेता है साहस।

साहस तभी आता है जब आपके पास एक मकसद हो, एक जूनून हो। कह सकते हैं कि साहस एक जिजिविषा है। भारतमुनि ने नाट्यशास्त्र में लिखा है—

        सः चविषादशक्ति धैर्यशैर्यादिभिविर्भावैरूत्पद्यते, अर्थात साहस- अविषाद, शक्ति, शौर्य, धैर्य आदि विभावों से उत्पन्न होता है। दुनिया के सभी धर्मों में साहस को श्रेष्ठ स्थान दिया गया है। इसका स्थान इसलिये भी बङा हो जाता है कि इस प्रवृत्ति से समाज एवं मानवता को लाभ पहुंचता है।

कोलम्बस अपनी सुख सुविधा छोङकर दुस्साहसिक यात्रा पर निकल पङते थे। व्हेनसाँग और फाह्यान तो पैदल ही हिमालय के मुश्किल रास्तों को, बाधाओं को लांघते भारत पहुंचे थे। वासकोडिगामा जैसे इन सभी साहसिक प्रवृत्ति वाले लोगों ने दुनिया को अनजानी जगहों से रू ब रू कराया।

साहस का सकारक्मकता से गहरा रिश्ता है। ये सकारक्मकता  ही थी कि कोपरनिकस, अरस्तु, सकुरात गैलिलीयो जैसे लोग बङे उद्देश्य के लिये साहस का प्रदर्शन कर सके।  सकारक्मकता नैतिक साहस को बढाती है। प्लेटो ने कहा कि साहस हमें डर से मुकाबला करना सिखाता है। साहसिक नेता गाँधी, नेलसेन मेंडेला, मार्टिन लूथर किंग जू. , ऑग सान सू की साहसिक पहल ने अन्याय के खिलाफ विशाल जनमत को खङा किया।

बहाव के विपरीत तैरने वाली सालमन मछली, जैसी- कई महिलाओं को आज भी उनके साहस के लिये याद किया जाता है। अफ्रिकी आयरन लेडी कहलाने वाली लाएबेरिया की राष्ट्रपति ऐलेन जॉनसन सरलिफ को शान्ति का नोबल पुरस्कार मिल चुका है। सरलिफ ने शान्ति की स्थापना के साथ ही समाजिक एवं आर्थिक विकास पर भी ध्यान दिया। रानी लक्षमीबाई ने अपने साहस के बल पर ही अंग्रेजों की विशाल सेना का डट कर मुकाबला किया।

साहस को उम्र या अनुभव से नही आंक सकते। बिरसा मुडां ने 25 वर्ष की उम्र में लोगों को एकत्र कर एक ऐसे आन्दोलन का संचालन किया जिसने देश की स्वतंत्रता में अहम योगदान दिया। आदिवासी समाज में एकता लाकर धर्मान्तरण को रोका और दमन के खिलाफ आवाज उठाई।

साहसपूर्ण जीवन केवल एक सीढी नही है वो तो अंतहीन सिलसिला है जिससे हर सीढी के बाद नया आत्मविश्वास मिलता है। पद्मश्री, अर्जुन पुरस्कार आदि अनेक पुरस्कारों से सम्मानित पर्वतारोही बछेन्द्रीपाल का कहना है कि जैसे-जैसे चुनौतियों को स्वीकार करते हैं, साहस और हिम्मत बढती जाती है। अंदर का भय कहाँ चला जाता है पता ही नही चलता है।

संक्लपवान साहसी स्टीफन ने 1974 में ब्लैकहोल के संबन्ध में क्रान्तीकारी खोज की। स्टिफन हॉकिंग एमियोट्राफिक लैटरल स्किल ऑरेसिस बिमारी से लङ रहे हैं जिसका कोई इलाज नही है, फिर भी स्टिफन हॉकिंग अपने कार्य में तल्लीन हैं। स्टिफन ने कई किताबें भी लिखी है।

जीत साहस नही है, बल्कि वह संर्घष साहस है, जो हम सब जीतने के लिये करते है। साहस केवल दैहिक क्षमता के हिंसक प्रर्दशन या भयानक हुंकार नही है। सफल न होने पर अगले प्रयास के लिये ऊर्जा जुटाना भी साहस ही तो है।

 दशरथ मांझी एक ऐसा नाम जिसे mountain man कहा जाता है, अपने साहस के बल पर उन्होने छेनी और हथौङी की सहायता से पहाङ को चीर कर 360 फिट लम्बा और 30 फिट चौङा रास्ता 22 वर्षो के अथक प्रयास से पूरा किया। उनके साहसी जूनून का ही फल है कि आज गया जिले के अत्री और वजीरगंज ब्लाक की दूरी 80 किलोमीटर से घटकर मात्र 3 किलोमीटर रह गई।

मित्रों कई बार हम अनजानी बातों से डरते है। हम जिन नौकरियों को पसंद नही करते, वे भी करते रहते हैं क्योंकि वो सुरक्षित एवं स्थायित्व वाली लगती हैं, इसी के चलते हम अपने सपनो को पूरा करने से डरते हैं। असल में हम अपनी जिंदगी में बदलाव से पहले यथास्थितिवादी बने रहना चाहते हैं। हम ये भूल जाते हैं कि महान आविष्कार इन्ही अन्जानी स्थितियों के प्रति साहस दिखाने से ही संभव हो सका है।

विवेकानंद जी ने कहा है कि- विश्व में अधिकांश लोग इसलिये असफल हो जाते हैं, कि उनमें समय पर साहस का संचार नही हो पाता वे भयभीत हो उठते हैं।

यदि मानव अपनी क्षमताओं के आकलन में साहस न दिखाता तो वह भी चौपाया होता। वास्तविकता तो ये है कि एक आम इंसान को कायदे की जिंदगी जीने के लिये इस जज्बे की उतनी ही जरूरत होती है, जितनी कि किसी महान व्यक्ति या योद्धा को। गाङी चलाने से लेकर दुनिया चलाने तक, कोई भी काम साहस के बिना नही हो सकता। साहस हर व्यक्ति में होता है, जरूरत बस इतनी है कि खुद को पहचाने, जाने और मंजिल की ओर एक कदम बढाने की। कहते हैं—Fortune  Favors The Brave.